छोटे से गाँव पिपलिया में, जहाँ ज्यादातर लोग अपने खेतों और पशुओं में व्यस्त रहते थे, वहाँ राजू और सविता की प्रेम कहानी शुरू हुई। राजू, गाँव का सबसे चतुर लड़का, और सविता, गाँव की सबसे सुंदर लड़की, एक दूसरे के साथ स्कूल के दिनों से ही प्यार करने लगे थे।
हर शाम, जब सूरज ढलता और गाँव की गलीयाँ सुनसान हो जातीं, राजू और सविता बड़के पीपल के पेड़ के नीचे मिलते। उस पीपल के पेड़ की कहानी भी अजीब थी। गाँव वाले कहते थे कि उस पेड़ में किसी आत्मा का वास है। लेकिन राजू और सविता ने कभी इन बातों पर ध्यान नहीं दिया।
एक दिन, राजू ने सविता को बड़के पीपल के पेड़ के नीचे बुलाया। रात का समय था और चाँदनी अपनी चाँदनी बिखेर रही थी। राजू ने सविता से कहा, "सविता, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और हमेशा तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ। क्या तुम मेरी बनोगी?"
सविता की आँखों में आँसू थे, पर वो खुशी के आँसू थे। उसने कहा, "हाँ राजू, मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगी।"
उनकी मुहब्बत में खलल डालने वाली चीजें तभी शुरू हुईं। पीपल के पेड़ के पास से अजीब आवाजें आने लगीं। कभी कोई हँसी, कभी किसी के रोने की आवाज। राजू और सविता दोनों ने ही इसे नजरअंदाज करने की कोशिश की, लेकिन गाँव के बाकी लोग डरने लगे थे।
एक दिन, गाँव के बुजुर्गों ने राजू को बुलाया और बताया कि उस पीपल के पेड़ के नीचे एक पुरानी आत्मा है। वह आत्मा, राधा नाम की एक लड़की की थी, जिसने अपने प्रेमी के विश्वासघात के बाद उस पेड़ के नीचे आत्महत्या कर ली थी। तब से उसकी आत्मा वहीं भटक रही है, और वह किसी भी प्रेमी जोड़े को चैन से रहने नहीं देती।
राजू ने सविता को सब कुछ बता दिया और वे दोनों डर के बावजूद अपने प्यार को निभाने की ठान ली। एक रात, जब वे फिर से पीपल के पेड़ के नीचे मिले, तो अचानक हवा तेज हो गई और पेड़ की डालियाँ जोर से हिलने लगीं। राजू और सविता ने देखा कि एक धुंधली परछाई उनकी तरफ बढ़ रही है।
वह परछाई राधा की आत्मा थी। उसने गुस्से से कहा, "तुम दोनों को भी वही दर्द सहना पड़ेगा जो मैंने सहा।"
लेकिन सविता ने हिम्मत दिखाते हुए कहा, "हमारा प्यार सच्चा है। हम किसी भी परीक्षा के लिए तैयार हैं।"
राधा की आत्मा ने उनकी आँखों में सच्चाई देखी और कहा, "तुम्हारी सच्चाई ने मुझे शांति दी है। अब मैं इस जगह को छोड़ कर जा रही हूँ।"
राधा की आत्मा ने जाते-जाते कहा, "इस पेड़ के नीचे अब कोई डर नहीं रहेगा। तुम दोनों हमेशा खुश रहो।" इसके बाद वह परछाई धीरे-धीरे गायब हो गई।
राजू और सविता ने एक दूसरे को कसकर गले लगाया और गाँव वापस लौट आए। उनके प्रेम की कहानी गाँव भर में फैल गई और पीपल के पेड़ के नीचे मिलने का डर भी खत्म हो गया।
राजू और सविता की शादी धूमधाम से हुई और वे दोनों हमेशा खुश रहे। पीपल का पेड़ अब प्रेम का प्रतीक बन गया और गाँव के लोग वहां मिलकर अपनी प्रेम कहानियों को आगे बढ़ाने लगे।
इस तरह राजू और सविता की प्रेम कहानी ने एक नए अध्याय की शुरुआत की और सबको यह सिखाया कि सच्चा प्यार किसी भी डर से ऊपर होता है।
